आधुनिक विद्यार्थी जीवन पर निबंध- Hindi me

विद्यार्थी जीवन जो कि एक त्याग का जीवन है लेकिन समाज के द्वारा इसे Golden Life कहाँ जाता है ये कितना सही है? 




जैसा कि हम सभी जानते हैं कि इस दुनिया में हर व्यक्ति को विद्यार्थी जीवन से गुजरना है या गुजर चुके हैं। किसी ने इस जीवन में अपने सभी सपनें को पुरा किया तो किसी ने अपना किमती समय व्यर्थ किया।

 इन दोनो शब्दों के बीच जो एक विद्यार्थी की जद्दो-जहद की जिंदगी है उसके बारें में मैं एक कहानी के तौर पे आपलोगों को बताना चाहता हूँ अपने कलम के माध्यम से।

विद्यार्थियों के प्रति माँ बाप के त्याग पर कुछ पंक्ति 


एक व्यक्ति का जीवन उसके पैदा होने के कुछ ही सालों के बाद एक विद्यार्थी के रूप में शुरूआत होती है। चाहे वह अमीर घर में हो या गरीब परिवार में।

लेकिन शायद हमारे यहाँ कुछ लोगों को अपनी गरीबी की वजह से विद्यार्थी जीवन नसीब नही होता है। लेकिन जिसने भी इस जिंदगी को जिया है शायद वे लोग खुशनसीब है।

हर माँ-बाप का सपना होता है की उसके बाल-बच्चें एक अच्छा, प्रखर, गुणी आदमी बनें।

अपने बच्चों के इन सपनें को संजोने में ये हर तरह के रुकावटों से लड़ते है। वे अपने बच्चों की सारी मनोकामना को पूरी करते है ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कतों का सामना ना करना पड़े।

ऐसे में हमें भी अपने परिवार का ख्याल रखते हुए उनके सपनों को, उनके उम्मीद को सच करना हमारा फ़र्ज है।

तो आइयें जानते हैं एक रोमांचक अंदाज में 


Level 0-10th


जब हममें सोचने समझने की शक्ति विकसीत हो जाती है तो हमारे माँ बाप हमारे प्रखर ज्ञान के लिए हमारा दाखिला स्कूल में करवाते है है। या कहें तो पहली बार हम अपने परिवार से अलग होते हैं। यहाँ से हमारा जीवन शिक्षा से जुड़ता है, हमारा विद्यार्थी जीवन की शुरुआत होती है।

जैसे जैसे हम आगे बढ़ते है हमारा शिक्षा स्तर बढ़ता है। हम पर बोझ बढ़ता ही जाता है लेकिन परिवार के साथ रहने पर ये हमें एहसास तक नही होता है।

जब हम 10th स्तर पे होते हैं तो लगता है कि ये हमारा जीवन का आखिरी मिशन है इसलिए खूब जोर शोर से पूरी लगन से मेहनत करते है और सफ़ल होते हैं।

Golden life की शुरुआत 




लेकिन इन्हें क्या पता की की असल जिंदगी की शुरूआत तो 10th बाद होता है।

कोई डॉक्टर बनने का सपना देखता है तो कोई इन्जीनियर।

ऐसे में जब पढ़ाई के लिए घर से बाहर निकलते है तो इनके पैर तले जमीन खिसक जाती है क्यूंकि ये अपनो से दूर हो जाते है उस समय का जो पल होता है बहुत ही भावूक होता है।

घर छोड़ने के कश-म-कश में 10 दिन तो ऐसे ही निकल जाता है। फिर शुरुआत होती है असल जिंदगी का जहाँ एक पर एक धुरंधर से मुलाक़ात होती है।

जहाँ कभी हम अपने बैच के टाॅपर होते थे। अब हमें अपने से धुरंधर मिलते है।

10 x 8 के वो कमरे की जिंदगी जिसमें एक सिंगल बेड का बिछावन, एक कुर्सी,एक टेबल के साथ एक अलग जिंदगी की शुरूआत होती है।

शाम में नए नए दोस्तों के साथ चाय की दुकान पे बैठकर चाय की चुस्की के साथ सिगरेट की धुआँ उड़ाते हुए शाम की सफ़र खत्म करते है।

और जब तक 4 साल का समय नही गुजरता बस ये सफ़र ऐसे ही चलता रहता है। जिसे हमलोग Golden life कहते है।

 त्याग की जीवन 




इस सफ़र के बच्चें में पढ़ने की ललक होती है। वे अपने सपनें को पुरा करने के लिए घर छोड़ते है और ये अपनो को त्याग कर, पूरी दुनिया से अलग होकर अपने सपनों को पुरा करने में जी जान लगा देते है और अपने सपनों को पुरा करते है।

ये बच्चें वाकई में जुनुनी होते है। इन्हें पढ़ाई के सिवा कुछ नही दिखता है इन्हें ज्यादा दोस्ती अच्छी नही लगती। ये दोस्ती बहुत ही सीमित लोगो से करते है।

इनलोगों का first priority पढ़ाई होती है उसके बाद सबकुछ। ऐसा नही कि ये लोग enjoy नही करते। ये सब कुछ करते हैं लेकिन पढ़ाई के साथ।


ये बात सही है कि जहाँ विद्यार्थी लोग एक तरफ अपने जीवन का त्याग करते है वही दुसरी तरफ जिंदगी को Golden life के तौर पे जीते हैं। इसलिए हमारा समाज विद्यार्थी जीवन को Golden life कहते है।


इसलिए हम विद्यार्थी जैसे Golden life जीते हैं वैसे ही अपने माँ बाप के सम्मान के लिए और उनके जीवन को भी Golden life बनाना हमारा कर्तव्य है।


                           







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