मानव समाज की बर्बरता




इस पृथ्वीजगत में मानव को सबसे समझदार प्राणी के रूप में जाना जाता है क्यूंकि इनमें समझने की क्षमता है, इन्हें अच्छे बुरे का फर्क पता है।

लेकिन आजकल की जो घटना हमारे समाज में आ रही है इससे तो लगता है की मानव समाज जानवरो से भी बदत्तर स्थिति में है। आखिर में इस समाज को क्या हो गया है। मानवता नाम का तो कोई चीज ही नही बचा है।

जहाँ देखो कुछ पैसे के लिए लोग एक दूसरे का मर्डर कर देते हैं, संपति हरपने के लिए अपने लोग को मार देते है, अगर घर में किसी  प्रकार की आपसी रंजिस हुई तो अपने रिस्ते को भूल जाते है। घर में माँ जो एक अजीम हस्ती है जिसके माध्यम से हम इस दुनिया में आये। उससे मारपिट कर रहे है। घर से बाहर निकाल दे रहे है। पिता जिसने हमें पालने पोषणे के लिए जिंदगी भर इस दुनिया में जद्दोजहद की लड़ाई लड़ी। उनसे हम बर्बरतापूर्ण बाते करते हैं। भाई-बहन जो एकसाथ बचपन से जवानी तक बड़े हुए आज हम संपति के लिए उन्हें जान से मार दे रहे है। 
ऐसा क्यूं भाईयों ?

इन सारी घटनाओ ने हमें मानव होने पर धब्बा लगा दिया है। अब तो मानव होने पे भी शर्म आती है।

हम मानव अपने स्वार्थ के लिए एक दूसरें का शोषण कर रहे है आखिर क्यों ?

शायद हम सभी जानते है की इस दुनिया के बाद एक और दुनिया है जहाँ हमें हर चीज का हिसाब देना है फिर भी लोग एकदम क्रुर होते जा रहे हैं।

आज से दो दिन पहले ही हमने सामाचार के माध्यम से एक घटना सुना जो केरल राज्य का है। जिसमें एक हाथनी जो गर्भ से थी उसे अनानास खिलाने के बहाने उसमें पटाखे रख कर उसे बर्बरतापूर्वक हत्या कर दिया है इस घटना ने तो मानव समाज की सारी हदो को पाड़ कर दिया। 

जहाँ हम हाथी को गज, गणेश की रूप में पूजा करते है उन्हें भगवान मानते है आज ये नरभक्षी लोग इन्हें भी नही छोर रहे है।जहाँ पुरा देश गणेश चतुर्थी को एक त्योहार के रूप में मनाता है ऐसे में ये जो घटना सामने आयी है क्या हमें ये मानव होने का सबूत देता है। 
नहीं भाईयों कभी नहीं।

इस घटना ने हम मानव को ही नही पुरे जगत को शर्मशार कर दिया है।
हे मानव शर्म करो शर्म!

इसलिए तो इस धरती पे हम तरह-तरह की प्राकृतिक घटनाओं को झेल रहे हैं। लेकिन ये लोग समझने का नाम ही नही ले रहे।

मानव जो मानव का ही अस्तित्व मिटाने पे लगा हुआ है। और तो और हम जिसे भगवान का दर्जा देते है ये लोग उन्हें भी नही छोर रहे तो फिर इनसे क्या उम्मीद की जा सकती है।

इन सारी घटनाओं ने मुझें अन्दर से एकदम झकझोर कर रख दिया है। और मैने सोचा क्यूँ ना अपने कलम की माध्यम से आपलोगो तक मेरी ये भावना पहुँचाया जाये ताकि आपलोग एक सभ्य समाज का निर्माण करें। जो लोग ये भूल गए है की मानव किस प्राणी का नाम है तो उन्हें एक सभ्य नागरिक बनाने का प्रयास किया जाये।

और आप ये भी जान ले कि इस धरती पे जितनी भी सारी प्राणी है उनसब का उतना ही हक़ है जितना हम मानव का है।

भाईयों आपलोग से नम्र निवेदन है की मानव समाज को शर्मशार होने से बचाए। 

                   ✍✍ ये लेखक के अपनी राय है।✍✍

                 ( Written by:- Meraj Hashmi) 

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1 Comments

  1. What's a people...
    Fuck kerala's literacy...
    #shameKerala's

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