## अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस ##

अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस क्या है? विश्वभर में इसे क्यूँ मनाया जाता है


पूरे दुनिया में मजदूरों पर हुए अत्याचार के खिलाफ उठे हक की लड़ाई की आवाज को सम्मान देने के लिए विश्व भर में "श्रमिक दिवस" मनाया जाता है। जिसे हम "मजदूर दिवस" के नाम से भी जानते है। इसे पूरी दुनिया 1 मई को मनाती है। भारत में भी मजदूर दिवस 1 मई को ही मनाया जाता है जिसका श्रेय मद्रास के भारती मजदूर पार्टी के नेता सिंगरावेल्लू चेट्यार को जाता है।

विश्व स्तर पर इसे 1 मई को ही क्यूँ मनाया जाता है?

1860ई में अमेरिका के शिकागो शहर के हेमामार्केट में मजदूरों के द्वारा एक हड़ताल हो रही थी। जिसका उद्देश्य था कि उनसे जो मनमानि काम कराया जाता है वो न हो और हमारी 8 घंटे की शिफ्ट हो। इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा बम फेंकें जाने के कारण पुलिसिया कार्यवाही में 7 मजदूरों की मौत हो गई। जो उस समय की बहुत ही बड़ी घटना थी। इस घटना के बाद मजदूरों की सारी मांगो को मान लिया गया। शहीद मजदूरों की याद में 1889ई में पेरिस के सामाजवादी सम्मलेन ने इसे 1 मई को श्रमिक दिवस के रूप में घोषणा किया तब से इसे 1 मई को ही मनाया जाता है

मजदूर दिवस पर अपनी कुछ व्याख्यान


मजदूर वर्ग जो हमारी समाज का आधारशिला है जिसके बिना हम किसी भी चीज़ की कल्पना भी नही कर सकते है। आज हमारे देश के 80% भूभाग पर जो खेती होती है वो हमारे किसान मजदूर भाई के वजह से ही मुमकिन है। बड़ी-बड़ी कंम्पनिया जो तरह-तरह के चीज़ो की उत्पादन करती है वो सब हमारे मजदूर भाई की वजह से ही मुमकीन होती है। लेकिन ये सब जानते हुए भी इनकी जो तनख्वाह मिलती है शायद ही इनके परिवार का पेट भरता है। इसलिए तो ये मजदूर बेचारे जिंदगी भर कमाने के बावजूद भी कुछ नही हासिल कर पाते। ना इनके बच्चे पढ़ पाते है और ना ही इनके परिवार का विकास हो पाता है। अगर सरकार के द्वारा इनके लिए  कोई स्कीम भी आती है तो हमारे देश के बुद्धिजीवी वर्ग इसे अपने स्तर से किसी किसी को बाँटते है बाकि सब अपने खातें में ट्रांसफर कर लेते हैं। ऐसे में भी ये सरकार के द्वारा जारी सभी स्कीमों से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में इनके विकास का तो दूर पेट पालना भी मुश्किल हो जाता है। कहीं कहीं तो इन्हें बँधुआ मजदूर की तरह खटवाने के बाद भी पैसा उनके मुताबिक नहीं मिलता। ऐसे में ये बेचारे क्या कर सकते है पढ़े लिखें तो है नही। आज हम अगर देखें तो देश में किसी भी स्तर पर वृद्घि हो या अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी ये सब मजदूरों के अथक प्रयास का ही नतीजा है। इसलिए हमें अपनी देश की प्रगति में मजदूरों की भूमिका का सराहना करनी चाहिए और इनकी सभी जरूरतो एवं रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिये। और इनका सम्मान करना चाहिये।

संविधान में मजदूर वर्ग के लिए कुछ कानून


 संविधान के (भाग-3) मौलिक अधिकार के Article (23-24) जिसमें शोषण के विरुद्ध अधिकार का व्यख्यान किया गया है जिसका मतलब है बच्चों को खतरनाक उधोग में काम करने पर प्रतिबंध। 14 साल से कम वर्ष के बच्चों को किसी भी खतरनाक काम के लिए नियुक्त नही किया जायेगा और ना ही खतरनाक नियोजन में नियुक्ति होगी। एवं 15-18 वर्ष के बच्चों की नियुक्ति किसी फैक्ट्री में डॉक्टर के द्वारा फिटनेस प्रमाण पत्र के आधार पर ही किया जाये।

मजदूर वर्ग पर कुछ चर्चित लोगो का कथन 

महात्मा गाँधी- किसी देश की तरक्की उस देश की कामगारो और किसानों पर निर्भर करती है।
एडम स्मिथ- दुनिया की सारी संपदा को वास्तव में सोने चाँदी से नहीं मजदूरी के द्वारा खरीदा जा सकता है।
रौबर्ट ग्रीन इंगरसाल- मेहनत एकमात्र प्रार्थना है जिसकी उत्तर प्रकृति देती है।

कोरोना महामारी का मजदूर वर्ग पर असर 

  • इस कोरोना काल में मजदूर वर्ग पर बेबसी का आलम छाया हुआ है 
  • सारी कल कारखाने बंद होने की वजह से ये सबलोग में भुखमरी का आलम बना हुआ है।
  • जो परिवार के पालनहार है पैसा कमाने की लालच में अपनो से दूर जाके फंसे है।
 ये लोग किसी तरह अपनी जिंदगी का गुज़र बसर कर रहे है ऐसे में 
सरकार इनके लिए कुछ मुहिम भी चला रही है लेकिन निचले स्तर पर बैठे अधिकारी इनकी गरीबी का मजाक बनाये हुए है।

ऐसे में सरकार से नम्र निवेदन है की ऐसे अधिकारियों के ऊपर कानूनी कार्यवाही किया जाये ताकि ये लोग मजदूर वर्ग के लोगो को परेशान ना करें। और उन्हें Social distancing का तरीका बताए।🙏🙏🙏

                                   (Written by : Meraj Hashmi)

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