#सोशल डिस्टेंस# सामाजिक दूरी

   Covid-19 के प्रसार पर 

 सामाजिक दूरी और तालाबंदी के प्रभाव पर एक लेख 




इस मौजूदा हालत में हमारे समाज में एक शब्द जो काफी ट्रेंड कर रहा है वह शब्द है सोशल डिस्टेंस यानि सामाजिक दूरी।

 इस शब्द का प्रचलन इतना बढ़ गया है कि हर बच्चे,बुढ़े,युवा,औरत के जुबान से सुनने को मिलता है जो कभी इस शब्द से अनजान थे। इनलोगो को तो हमेशा से समाज के साथ मिलकर रहने को सिखाया गया है लेकिन इस चीनी वायरस ने हमारे समाज में इस शब्द को आने पर मजबूर कर दिया और हमारे समाज में इतना दूरी पैदा कर दिया कि अपने घर के सदस्य ही हमसे दूरी बना कर रह रहे है।

 हालात ऐसा हो गया है कि जो कभी हम अपने दोस्तों के साथ कहीं भी हाथ में हाथ डालकर घूमते फिरते लेकिन आज उनसे हाथ मिलाने में भी झिझकते है। और आज इस शब्द का इतना अहमियत हो गया है कि हमारे देश के प्रधानमंत्रीजी से लेकर एक आम आदमी भी अपने स्तर से लोगो को जागरुक कर रहा है।

आज पूरे दुनिया में सोशल डिस्टेंस के पालन पर जोर-शोर दिया जा रहा है। लोगों को घरों में रहकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को कहा जा रहा है। शहर,गाँव,बाज़ार,हर जगह सरकार द्वारा सोशल डिस्टेंस को पालन करने को कहा जा रहा है।

क्या हम सोशल डिस्टेंस का पालन करके कोरोना वायरस पर जीत हासिल करेंगे?

हाँ, सोशल डिस्टेंस का पालन करके हम कोरोना वायरस पर जीत के करीब पहुँच सकते हैं। जब पहली बार हमारे देश भारत में कोरोना का मामला आया था तो सभीलोगों का दावा आ रहा था कि अब भारत की बर्बादी तय है क्यूंकि यहाँ कि जनसंख्या इतना है की कंट्रोल कर पाना मुश्किल है लेकिन हमारे देश के प्रधानमंत्रीजी की सूझ-बूझ से देश में पहले लॉकडाऊन करके लोगों को एकदुसरे से अलग करवायें और सारी भीड़-भाड़ वाली यातायात को बन्द करके एक मिशाल पेश किए। लोगों से इंटरनेट के माध्यम से सोशल डिस्टेंस को पालन करने को कहें। तब जाके हमारे देश में कोरोना का ग्राफ पूरी दुनिया में सबसे कम रहा। इस निर्णय को आज पूरी दुनिया मान रहीं है और लॉकडाऊन को follow कर रही हैं।



लॉकडाऊन में समाज पर सोशल डिस्टेंस का प्रभाव  

इस लॉकडाऊन में समाज पर सोशल डिस्टेंस का बहुत ही बड़ा प्रभाव पड़ा है। लोग अपने घरों में ही रह रहें है जिससे लोग एक दूसरे के सम्पर्क में कम आ रहे हैं। इस महिने में जहाँ भारत में शादी-व्याह का त्योहार चलता था सब बंद है। सामूहिक कार्यक्रम से लेकर पर्व- त्योहार पर भी रोक है। इन सभी फैसलों से भी सोशल डिस्टेंस का एक अच्छा परिणाम देखने को मिल रहा है।

सामाजिक दूरी शब्द पर भेद भाव का प्रभाव 

सामाजिक दूरी शब्द पर कहीं-कहीं भेद भाव का मामला भी प्रकाश में आया है। कुछ असामाजिक तबके के लोग कुछ खास धर्म के लोगों के प्रति भेद-भाव की नजरों से भी देख रहे है। ऐसे मामलो पर उच्चतम न्यायालय में एक याचिका भी दायर हुई और उसमें बताया गया की इस सोशल डिस्टेंस शब्द के बजाए फिजिकल डिस्टेंस का प्रयोग किया जाये ताकि समाज में भेद-भाव की स्थिति पैदा ना हो। लेकिन उच्चतम न्यायालय द्वारा इस याचिका को खारिज कर दिया गया और सोशल डिस्टेंस शब्द को ही प्रयोग करने के लिए कहा गया।
Note:- इन सामाजिक कुरीतियों को छोर हम सबको सोशल डिस्टेंस का पालन करना है और लोगो को भी इसके प्रति जागरुक करना है।

                            (Written by: Meraj Hashmi)

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